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शनिवार, मई 13, 2017

पोंछ कर आँसू आँख से उसने भी कहा

उसकी आँखों में कोई दुःख बसा है शायद;
या मुझे खुद ही वहम सा हुआ है शायद;
मैंने पूछा कि भूल गए हो तुम भी क्या;
पोंछ कर आँसू आँख से उसने भी कहा शायद↖↖

शुक्रवार, मई 12, 2017

जो मिलेगा कोई तुझसा उसे ज़िन्दगी

कभी दोस्ती कहेंगे कभी बेरुख़ी कहेंगे;
जो मिलेगा कोई तुझसा उसे ज़िन्दगी कहेंगे;
तेरा देखना है जादू तेरी गुफ़्तगू है खुशबू;
जो तेरी तरह चमके उसे रोशनी कहेंगे↵↵↵